Sunday, 29 June 2014

तुम्हारे घर में - राकेश रोहित

जब मैं जिंदगी का पता भूल जाता हूँ
कविता मैं लौटता हूँ तुम्हारे घर में।

1 comment:

  1. क्या खूब कहा आपने राकेश !

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