Sunday, 2 April 2017

पुकार - राकेश रोहित

नदियों ने सौ बार कहा है
वे चाहती हैं तुम्हें
मुझे एक बार कहने के लिए भी
नदी के एकांत में जाना पड़ता है।

यह जो नदी की तरह
तुम बहती रहती हो
इस मरु थल में
क्या तुमने किसी पुकार पर
कभी मुड़ कर नहीं देखा!

Sunday, 12 February 2017

वसंत काल में एक इच्छा - राकेश रोहित

अंधेरी धरती से पीला रंग निकालकर
जहाँ उछाह से उमगते हों
सरसों के फूल
वहीं खड़े होकर
मैं चूमना चाहता हूँ
तुम्हारे होठों पर चमकते वसंत को!